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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

रिद्धि सिद्धि के नाथ हैं, सबसे अलग स्वरूप।
विघ्न हरण मंगल करण, भरे ज्ञान का कूप।
दिवस सहज बुधवार प्रिय, श्री गणपति महाराज,
विद्या बुद्धि विवेक दे, जग में रूप अनूप।।

भक्त कँवरिया ले चले, महादेव के द्वार।
भक्ति योग संगम बना करते जय-जयकार।
अपनाते हर भक्त को, आशुतोष भगवान,
विपदा सारी मेट कर,भर देते भंडार।।

सोमवार सोलह रखें,जो भी व्रत उपवास।
अड़चन सारी दूर कर,पूर्ण करे हर आस।
सरल सहज व्यवहार है, होते शीघ्र प्रसन्न,
करते कृपा अपार हैं, खुशियांँ आती पास।।

कल्पों का क्रम है बना, मायावी संसार।
आना-जाना जग लगा, कैसे हो भव पार।
है उपाय बस एक ही, शंभु नाम का जाप,
धर्म-कर्म के योग से,होता है उद्धार।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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