
सीने में सपने, आँखों में आस,
दिल में हो कुछ कर गुजरने का विश्वास,
राहें कठिन हों, कदम न रुकें,
हौसलों के दीप कभी न बुझें।
युवा हो तुम, तो तूफ़ानों से क्या डरना,
गिरकर उठना और फिर आगे बढ़ना,
हर ठोकर को अपनी सीख बना लेना,
हर आँसू को अपनी ताकत बना लेना।
तुम्हारी उड़ान सिर्फ तुम्हारी नहीं,
इस देश की पहचान भी है कहीं,
तुम्हारे हाथों में कल की तस्वीर है,
तुम्हारी मेहनत में भारत की तकदीर है।
आसमान छोटा लगे तुम्हारे अरमानों के आगे,
मंज़िलें खुद चलें तुम्हारे इरादों के आगे,
बस अपने भीतर की लौ जलाए रखना,
सपनों को सच करने का जुनून बनाए रखना।
उड़ो कि तुम्हें अभी इतिहास लिखना है,
उड़ो कि तुम्हें नया आकाश दिखना है,
तुम रुक गए तो सपने रुक जाएँगे,
तुम बढ़ोगे तो नए युग बन जाएँगे।
तुम उम्मीद हो, तुम विश्वास हो,
तुम भारत का उजला एहसास हो,
तुम्हारी उड़ान में देश की शान है,
तुम ही तो भारत की नई पहचान हो।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र













