
सावन का पावन महीना है, शिव का जलाभिषेक करें।
बेल पत्र चढ़ाएं उन पर,काम ये सब मिल नेक करें।।
धरती की धानी चुनर है, अभी बरस रही है अमृत धार।
बम बम भोले की जय बोलो, बेड़ा होगा अपना पार।।
पिउ पिउ बोल रहा है पपीहा,कोयल गीत सुनाती है।
सोमवार दिवस सावन का आया,सजनी खीर बनाती है।।
शिव मंदिर की शोभा न्यारी,शिव की जय जयकार है।
भक्ति भाव सारे भक्तो में,शिव की महिमा अपरंपार है।।
शिव ही शक्ति शिव ही भक्ति शिव ही खेवनहार है।
ऐसे भोले भंडारी शिव पर पावन गंगा जल धार है।।
शिव का ध्यान करो सारे जन शिव की महिमा अपरंपार।
वो नील कंठ, वो महादेव, जग का करते है वो उद्धार।।
गरल पान कर लेते है शिव,वो सृष्टि को देते अभय दान।
वो त्रिपुरारी,वो गंगाधर, सब देवों में उनका सम्मान।।
वो उमापति,वो चंद्रचूड़, वो पशुपति नाथ, वो त्रिलोचन।
वो भोले बाबा वो महाकाल, भक्तों के वो संकट मोचन।।
वो नंदीश्वर, वो वाम देव,वो अनघ, वो ही शूलपाणि।
उनकी जय जयकार,आरती करे उमा रमा वीणापाणि।।
सोनी बरनवाल “कशिश”
जमुई, बिहार













