
आज हवा में जो आज़ादी है,
वह यूँ ही नहीं आई है,
इसकी हर एक साँस में
किसी वीर की कुर्बानी समाई है।
किसी माँ ने अपना लाल दिया,
किसी बहन ने भाई खोया,
किसी ने हँसकर प्राण दिए,
किसी ने जीवन देश पर बोया।
न सिंहासन की चाह रही,
न यश का कोई अभिमान,
माटी की पुकार सुनकर
अर्पित कर दिया अपना प्राण।
फाँसी के फंदे पर भी जिनके
होंठों पर मुस्कान रही,
उनके साहस की लौ से ही
भारत की पहचान बनी।
जिन आँखों में सपने थे,
उनमें बसता हिंदुस्तान,
जिन कदमों की मंज़िल थी
केवल माँ भारती का मान।
आज हम खुली हवा में
अपने सपनों को जीते हैं,
हर निर्भय शब्द के पीछे
उनका साहस पाते हैं।
हे आज़ादी के मतवालों,
तुम्हें शत-शत नमन हमारा,
तुम्हारे त्याग की रोशनी में
भारत है जग से प्यारा।
जब तक तिरंगा लहराएगा,
तुम्हारा मान रहेगा,
जिनके त्याग से मिली स्वतंत्रता की साँस,
अमर सदा उनका हिंदुस्तान रहेगा।
डॉ. पल्लवी सिंह 'अनुमेहा '
लेखिका एवं कवयित्री
बैतूल, मध्यप्रदेश













