Uncategorized
Trending

ज़िन्दगी का आखिरी सच

मरने के बाद पता नहीं क्या ले कर जाऊंगा,
जलाकर सब लौट जायेंगे और मै राख बन जाऊंगा।
रोयेंगे कुछ पल घरवाले आंसू खूब बहाएंगे,
घर आते ही कपडे उतार सबसे पहले नहाएंगे।

फेंक देंगे कपडे मेरे चीजों और सामानों को,
तेरवी में घर बुलाकर खाना खिलाएंगे मेहमानों को।
कुछ दिन तक मेरा नाम हर बात में आएगा,
“वो भी क्या इंसान था” कहकर बुलाया जायेगा।

सच तो ये है की कहानी यही रुक जानी है,
दो गज कपड़ा मुट्ठी भर मिट्टी बस यही जिंदगानी है।
जिनके वास्ते महल बनाए, वो बेच देंगे उसे,
जिनके लिए जागे रातें, वो भूल जाएंगे उसे।

बैंक का हिसाब बंट जाएगा, जमीन के टुकड़े होंगे,
दीवार पर टंगी तस्वीर पर धूल के कण होंगे।
जिस कुर्सी पर हुकुम चलाया, वो किसी और की होगी,
तेरा नाम लेने वाला भी कहेगा “वो पुरानी बात होगी”।

रिश्तेदार कर्ज का जिक्र करके किनारा कर लेंगे,
कंधा देने वाले भी अगले दिन नजरें फेर लेंगे।
हम तो कब के राख होकर हवा में उड़ जाएंगे,
नाम के सिवा यहाँ कुछ भी साथ नहीं जाएगा।

वो गाड़ी जिस पर गर्व था, अब कोई और चलाएगा,
वो मोबाइल जिसमे फोटो थी, कोई और चलाएगा।
अलमारी के कपड़े बंट जाएंगे, जूते पुराने हो जाएंगे,
तेरे बिना घर का हर कोना धीरे-धीरे सन्नाटा हो जाएगा।

किताबों में किस्से रह जायेंगे लोग कहानी सुनाएंगे,
तेरे कर्मो का हिसाब खुद वक्त लगाएगा।
खाली हाथ आये थे खाली हाथ जायेंगे,
इसलिए जीते जी जमीर मत बेच इंसान बन कर जी ले।

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *