
चौबीसो घंटे और रात – दिन
गुण गान देश का तो करते हैं,
नेता जी पर यही बता दो क्या,
भारत की सीमायें जानते हैं?
देश प्रेम अगर करते हो तो,
क्या हंसकर गोली खाओगे,
राजनीति चमकाना सरल है,
बेटे बेटी को भर्ती करवाओगे?
भारत में शिक्षा का क्या कोई अर्थ नहीं,
नेता अनपढ़ हो तो क्या कोई फ़र्क़ नही,
सब अधिकारी, कर्मचारी, आईएएस,
आईपीएस इन्हें सलाम बजाते हैं।
कितने बड़े अपराधी हों क़ानूनन
क्रिमिनल केस भी तो मामूली हैं,
जेलों से भी चुनाव लड़ जाते हैं,
फिर भी ये चुनाव जीत जाते हैं।
घोटाले पर घोटाले करते हैं ये,
पर कितनी बड़ी विडम्बना है ये,
अक्सर सजा नहीं होती इनको,
नेता अदालतों से भी छूट जाते ये।
इनके लिए भी लिखित परीक्षा हो,
इनको इंटरव्यू भी बाकायदे देना हो,
ऐसा नियम इनके लिए बनाया जाये,
शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की जाये।
शिक्षा का स्तर इनका बढ़ाया जाये,
नेता की वार्षिकी भी लिखवाई जाये,
इनकी संपति दिन दूनी कैसे बढ़ती है,
इस पर भी तुरंत लगाम लगायी जाये।
देश बनेगा फिर सोने की चिड़िया,
योग्य व्यक्ति विधायक बन सकें,
उससे भी योग्य सांसद और मंत्री हों,
इनके वेतन आयोग से निर्धारण हों।
आदित्य यदि भारत को अब फिर से
एक बार सोने की चिड़िया बनना है,
जयजवान, जयकिसान, जयविज्ञान,
का घोष इस अमृत काल में गुनना है।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












