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भारत माँ का मान

भारत माँ का मान बचाने, निकले वीर जवान,
हँसते-हँसते शीश चढ़ाएँ, रखें देश की शान।
सीमा पर दिन-रात खड़े हैं, बनकर दृढ़ प्रहरी,
उनके कारण सुरक्षित रहता, अपना हिन्दुस्तान।

माटी की सौंधी खुशबू से, बढ़ता देश का मान,
गंगा-जमुना की लहरों में, गूँजे भारत-गान।
ऋषियों की इस पुण्य धरा ने, जग को राह दिखाई,
इसके कण-कण में बसता है, संस्कृति का सम्मान।

माँ की आँखें राह निहारें, लेकर मन में ध्यान,
पत्नी अपने अश्रु छिपाए, रखती दृढ़ अभियान।
घर-आँगन की सारी पीड़ा, हँसकर वो सहती है,
देश सुरक्षित रहे सदा बस, इतना ही अरमान।

आओ मिलकर प्रण दोहराएँ, बढ़े वतन की शान,
जाति-धर्म के भेद भुलाकर, बनें एक पहचान।
प्रेम, दया, सद्भाव जगाकर, आगे बढ़ते जाएँ,
विश्व-पटल पर यूँ ही लहराए, भारत देश महान।

पूर्णिमा सुमन
झारखंड धनबाद

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