
विधा : पद्य
कहाॅं गए खुदीराम सुभाष ,
कहाॅं गए आजाद तिलक ,
कहाॅं खोए पड़े तात्या टोपे ,
तुमको ये नयन खोजते हैं ।
आजादी तूने हमको दी है ,
किंतु तुमको क्या मिला है ,
तूने कर दी प्राण न्यौछावर ,
हमारा हृदय यह खिला है ।
घर त्यागा परिवार त्यागा ,
गाॅंव समाज ये त्याग दिया ,
नहीं समझा जो है बातों से ,
उसको गोली से दाग दिया ।
क्रांतिकारी तू नेता बनकर ,
जन जन को तू जगा दिया ,
जंग का ऐसा बिगुल फूॅंका ,
अंग्रेजों को तूने भगा दिया ।
न जाएगी शहादत खाली ,
तेरे नाम कसमें भी खा ली ,
ईंट से ईंट बजा देंगे हम भी ,
नाम लेकर जय माॅं काली ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।












