
घनाक्षरी छंद
अंग दान महा दान,
काम है बड़ा महान।
देके अंग दान दूजा,
जीवन बचाइये।।
मानते है काया माटी,
बाद मृत्यु मिट जाती।
अंग दान देके कोई,
पुण्य तो कमाइये।।
काया ईश वर दान,
आत्मा का ये है मकान।
स्वस्थ साफ रखना है,
ये समझ जाइए।।
नेत्र दान, रक्त दान,
या हो लीवर का दान।
देह आए किसी काम,
कर्म कर जाइए।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश












