
शौर्यमयी इस भारत भूमि का, अमर इतिहास उकेरूंगी,
वीर शहीदों के बलिदान की, पावन तहरीर उकेरूंगी।
मंच सजा, यह झांकी सजी, देश का गौरव गान बढ़ा,
वीर शहीदों के लहू से, इस तिरंगे का मान बढ़ा!
शत-शत नमन उस शौर्य को, नमन इन जाबाज़ों को,
सलाम देश के रखवालों को, वतन के जाबाज़ों को!
मंगल पांडे की सिंह-गर्जना, आज ज़हन में ज़िंदा है,
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, का रण-कौशल ज़िंदा है।
तात्या तोपे, कुंवर सिंह की, वो तलवार पुरानी थी,
गोरे थर-थरकाँप उठे, वो ऐसी क्रान्ति दीवानी थी।
शत-शत नमन उस शौर्य को, नमन इन जाँबाज़ों को।
भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, का वो पावन त्याग सुनो,
चंद्रशेखर की मूँछों का ताव, और सीने की आग सुनो।
बिस्मिल और अश्फ़ाक़ का वो, अमर तराना गूँज रहा,
फाँसी के फंदे को चूमा, वो जज़्बा आज भी गूँज रहा।
शत-शत नमन उस शौर्य को, नमन इन जाँबाज़ों को!
नेताजी सुभाष की वो, ‘दिल्ली चलो’ हुंकार याद करो,
बापू के सत्य-अहिंसा का, वो दृढ़ संकल्प और प्यार याद करो।लोहपुरुष पटेल ने बांधी, जो अखंडता की डोरी थी,
इस माटी की रक्षा की ख़ातिर, छिड़ी जंग वो पूरी थी।
शत-शत नमन उस शौर्य को, नमन इन जाबाज़ों को!
सजी तिरंगे के रंगों में, यह अनुपम झांकी प्यारी,
शीश झुकाकर नमन कर रही, आज इसे दुनिया सारी।
कोरे काग़ज़ पे ‘रजनी’ ने, देश का पावन पैग़ाम लिखा,
मिट जाएँगे वतन की ख़ातिर, हर धड़कन पर हिंदुस्तान लिखा।शत-शत नमन उस शौर्य को, नमन इन जाबाज़ों को,हाँ, शत-शत नमन उस शौर्य को, नमन इन जाबाज़ों को।
रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश













