
यह जो तुम मसरूफियत का हवाला देते हो यह जो तुम मजबूरी की गिनती गिनाया करते हो यह जो समय की कटौती की कहानी हमें बड़ी लच्छेदार सुनाया करते हो और फिर भी हमें हद है जनाब जरा अपने गिरे वह हमें भी तो झांकी है खुद कितने मौजूद रहे हर हालत में हमारे साथ जरा अपना भी तो जरा अपना भी तो आईने में जाकर दिल को देखिए क्या खुद को वहां पर सफा पाएंगे
रचना बढ़िया













