
नो बैग डे पर कविता
आज बस्ता छुट्टी पर है,
बचपन आज ड्यूटी पर है।
न किताबों का शोर है,
न होमवर्क का ज़ोर है,
आज सीखने का अंदाज़ नया,
ज्ञान का कुछ अलग ही दौर है।
आज दीवारें नहीं, मैदान पढ़ाएगा,
पसीना हर इक सवाल सिखाएगा।
मिट्टी हाथों में, रंग आँखों में,
सपना सजेगा अपनी बातों में।
पेड़ों के पत्ते गिनकर
गणित समझ में आएगा,
उड़ते पत्तों को देखकर
विज्ञान समझ में आएगा।
कहानी कहेगी दादी-नानी,
चित्र बनाएंगे इनकी कहानी ।
खेल-खेल में सीखेंगे बच्चे,
अपने मन को खुशियों भरेंगे आज ये बच्चे।
आज बस्ता छुट्टी पर है,
पर बच्चा स्कूल में मस्ती पर है।
सीखेंगे हम मिलकर गाना,
खेल, कला और हुनरको अपनाना।
कल फिर किताबें आएँगी,
कक्षाएँ फिर मुस्कुराएँगी।
पर हर शनिवार का दिन याद रहेगा,
जब बिन बैग के भी ज्ञान बता रहेगा।
क्योंकि शिक्षा सिर्फ किताबों में नहीं,
जीवन के हर अनुभव में मिलती है।
आज बस्ता छुट्टी पर है,
और बचपन सीखने की ड्यूटी पर है।
धर्मेंद्र कुमार राठौर
व्याखाता भौतिक विज्ञान
पीएम श्री राज.उच्च. माध्य.विद्यालय झालावाड़,राजस्थान













