
प्रेम की सौगात लिए,
आया पुनीत त्योहार।
भ्राता बंधु अरु भगिनी का,
होता प्रेम अपार।।
निस्वार्थ भाव से बंधे हुए,
है यह ऐसा प्रेम।
प्रेम डोरी में बांध के,
गजब निभाए नेम।।
शब्द एक अरु अर्थ अनेक,
बंधन–बंधन का कारण।
यह बंधन है विश्वास प्रेम का,
रक्षा करे अकारण।।
धन्य हुई एक भाई मिला,
जिनका प्रेम अनंत।
कृपा मिले प्रभु राम की,
यह तो सनेह संबंध।।
रिश्ता ऐसा हो प्रगाढ़,
जिसका ना होए अंत।
भाई बहन का नेह प्रेम,
रहे सदा जीवंत।।
–ऋचा चंद्राकर













