
चंदन वंदन पूजा थाली,
लेकर तुम्हरे पास गई।
हिय में केवल भातृ प्रेम,
तुमसे मिलकर मैं धन्य हुई।।
प्रेम डोर में बांध तुम्हे,
तिलक करूं हो सदा विजय।
वंदन करती हूं ईश्वर से,
जीवन में हो सुख शांति अजय।।
मिष्ठान्न का तुम्हे भोग लगाऊं,
आए जीवन में प्रेम मधुर।
वाणी से बरसे अमृत,
कलुषित भाव से रहे दूर।।
पाकर आशीर्वाद तुम्हारा,
धन्य धन्य मैं धन्य हुई।
शुभकर्मो के कारण ही,
इस जनम तुम्हारी बहन भई।।
अप्रतिम प्रगाढ़ यह प्रेम अरु,
एक दूजे का विश्वास।
मात पिता सम प्रेम दियो,
भ्राता तुम्हहि सबसे खास।।
ऋचा चंद्राकर












