
भाई-बहन का रिश्ता न्यारा,
प्यार की बहती, निर्मल धारा।
बचपन की वो मीठी बातें,
हँसी-खुशी की हैं सौगातें।
नोंकझोंक और हंसी-ठिठोली,
प्यार तथा सम्मान की बोली।
कभी लड़ाई, कभी मनाना,
एक-दूजे को सदा हँसाना।
हर मुश्किल में साथ निभाएँ,
अपनेपन से, घर महकाएं।
सुख दुख का है साथ सुहाना,
बचपन से जाना पहचाना।
सदियों से है, अनुपम प्यारा,
रिश्ता यह, सबसे है न्यारा
-भानुप्रकाश शर्मा
(स्वरचित, मौलिक रचना)













