
सावन की पूर्णिमा,
चाँदनी का निखार
लेकर आई है बहना,
राखी में अपना प्यार।
कलाई पर बंधेगी,
स्नेह की डोरीl
जिसमें सिमटी है,
बचपन की दुनियाँ सारीl
बचपन की वे मीठी यादें,
वो लड़ना और मनाना,
कभी रूठना, कभी हँसना,
फिर चुपके से मुस्काना।
भाई कहता—“तू हँसती रहना,
तेरी खुशी मेरी जीत,”
बहना कहती—“सदा सलामत,
रहे मेरे भैया की प्रीत।”
न धन चाहिए, न महँगा उपहार
बस यूँ ही बना रहे जीवन भर,
भाई-बहन का प्यार।
बादल बरसें, सावन आए,
ऋतुएँ बदलें हजार,
पर कभी न फीका पड़ने पाए
भाई-बहन का प्यार।
पूनम कुमारी( शिक्षिका )
मधुबनी बिहार












