
समय बड़ा अनमोल है, करना मत बेकार।
बीता जीवन फिर कभी, मिलता नहीं उधार ।
जो करता श्रमदान है, प्राप्त करें हर लक्ष्य,
माँ लक्ष्मी करती कृपा, भर देती भंडार।।
निर्मल अंतस को करें , संस्कृति की मृदु बोल।
कच्चे धागे का बंध है,इस जग में अनमोल।
मोल नहीं उपहार का, निश्चल बहती प्रीत,
इक दूजे रक्षक बनें, विपदा जाती डोल।।
सागर पुत्री आप हैं, नहीं अर्थ की थाह।
श्री हरि के उर में बसी,मिटी हृदय की आह।
जन-जन का कल्याण कर, करती भव से पार,
झोली उसकी माँ भरे,सत्य चले जो राह।।
भ्रात-भगिनि के नेह का,रक्षाबंधन पर्व।
बहना को होता सदा,भाई पर अति गर्व।
बाँध कलाई सूत्र को,देती है आशीष,
भागेंगे यमदूत भी,कष्ट दूर हो सर्व।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश












