
बाजार में सजी धजी है राखियां,
ऐसा लगा कि शहर गांव में हजारों झाकीयां ,
संस्कार संस्कृति और सभ्यता को प्यार से निभा रहीं हैं राखियां,
भाई,बहन छोटे – बड़े मायने नहीं रखते,
समर्पण और समरसता का त्यौहार राखियां,
दोस्तों को पड़ोसी को, सैनिकों को, गुरु जी को, और भगवान जी को श्रद्धा सुमन अर्पित बनी हुई है राखियां,
उपहार कार्ड खरीदें तो कभी किमत नहीं देखा करते
किस्मत में खुशियां भरने से हमारी और आपकी धर्म की रक्षा का वचन दिया करती है राखियां ,
हिफाजत करना त्यौहार
है प्रेम रस बरसाती है घर घर प्यारी प्यारी सुंदर सुंदर हमारी राखियां ,
कोमल हाथों से नन्हे हाथों से बहने अपने प्यारे से लाड़ले से, मासुमियत लिए भाई को बांधने में मुस्कुराहट सजी खुशियां बांटती है राखियां,
गिफ्ट साड़ी मिठाई और नारियल और कुंकुम रोली से सजी-धजी हाथों से बंधे हमको सुंदर सुंदर राखियां,
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












