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शब्दों की फुलवारी ( दया क्षमा सत्य तप जीवन)

विधा : कविता


मानव में तुम जन्म लिए हो ,
दूसरों के हेतु भी सपना लो ।
जल थल नभचर जीव तेरे ,
मानवता भी तुम अपना लो ।।
दया क्षमा सत्य तप जीवन ,
शर्त रूप ये ईश के इशारे हैं ।
हर जीवों के रक्षक हम तुम ,
इसीलिए ईश के भी प्यारे हैं ।।
ईश से इश्क किया है तुमने ,
इस से इश्क भी करना होगा ।
बचा सकें दूसरों का जीवन ,
इसके लिए भी लड़ना होगा ।।
ईश से ही हमारा इश्क होना ,
हमारे ईश का दिया वर है ।
ईश दिया वर तो ईश्वर बना ,
जिनके आगे झुकाना सर है ।।
मानव जीवन तो बहुमूल्य है ,
दया क्षमा सत्य तप शृंगारी ।
उससे बहुमूल्य है वाणी तेरी ,
सजा ले शब्दों की फुलवारी ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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