
कच्चे धागे की डोर बहना खींच ले आता है तेरी ओर बहना।
आज भाई बहन त्यौहार का डंका बज रही है चारों ओर बहना।।
आज भाई बहन का प्यार देखकर माँ बाप भी हंसते गाते हैं।
बचपन का नोक झोक भूलकर बहन भाई को राखी बांधती है।।
हर रिश्ते नातों से भाई बहन का रिश्ता है निर्वाथ बहना।
इस लिए कहती है सारी दुनियाँ इस रिश्तों का है क्या कहना।।
माँ बाप के बाद भाई बहन एक दूजे का सहारा बनते हैं।
भाई बाप बनकर सहारा देता है तो बहन माँ बनकर सहारा देती है।।
क्योंकि वह दोनों ही एक दूजे को समझते हैं बाकी तो सौदा करने आते हैं।
यही तो होता है भाई बहन का प्यार आऔ आज मनाते है राखी का त्यौहार।।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,












