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भाई दूज , रक्षाबंधन

भाई दूज , रक्षाबंधन__

प्रेम से जो सदा जलती,मैं वह ही रोसनाई हूं।
दिखाए आंख जो टेढ़ी,मैं उनके हित कसाई हूं।।
समूचे विश्व की बहनो,ये कहता हिन्द का बेटा,
नहीं जिसके कोई भाई,मैं उन बहनों का भाई हूं।।

बहनों की रक्षा का प्रण__

सभ्यता का सदा आचरण कीजिए ।
सामने हो कुकर्मी तो रण कीजिए।
जिंदगी को सभी जी सकें शान से,
सारी बहनों की रक्षा का प्रण लीजिए।।

बहनों, बेटियों से __

बेटियों से, बहनों से, कहता हूं हाथ जोड़,
बच के रहो सदा शबाब व शराब से।
माता, पिता, भाई, दुश्मन नहीं हैं तुम्हारे,
इन्हें त्यागने का भाव भी न रहे ख़्वाब में ।।
कुल, खान_दान के भी मान का खयाल रहे,
नीति, रीति, प्रीति का हो पालन हिसाब से,
ज़िंदगी अमोल है न इसकी उपेक्षा करो,
दिल न लगाना किसी साहिल आफताब से।।

भाई बहन

हृदय की भावनाओं का,अडिग अहसास है बहना,
परस्पर प्रेम का हर पल,सहज आभास है बहना,
बहन,भाई का ये रिश्ता परम पावन सनातन है,
अगर आनन्द है भाई तो, तो उर उल्लास है बहना,

डॉ शिव शरण “अमल “

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