Uncategorized
पसंद करने और प्यार करने मे क्या अन्तर है
प्यार दिल और आत्मा से होता है पसंद के लिये ये जरूरी शर्त नही है ।
प्यार निस्वार्थ होता है पसंद मे ये लाजिमी नही है।
प्यार संसारिक समाजिक शारीरिक विकारों से ऊपर होता है इसमे स्वार्थ का स्थान नही होता जबकि पसंद अपनी स्वार्थवश भी हो सक्ता है।
प्यार एक वचन होता है पसंद सिर्फ समय का पैबन्द होता है।
पसंद मे ऊपरी आकर्षण प्रधान होता है प्यार आत्मा प्रधान होता है।
दो लाइन्स मे अपनी बात खत्म करना चाहूंगा
दिल की सदा दिल तक पहुंचे तो प्यार होता है
दिल की सदा दिमाग मे पहुंचे तो पसंद का एक सुरूर होता है।
धन्यवाद ।
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













