
खुशियों का खजाना मन में,
मुस्कानों से भरता जाए।
छोटी-छोटी नेकियों से,
जीवन सुंदर होता जाए।
धन-दौलत से क्या मिलता है,
यदि मन में संतोष नहीं।
अपनों का स्नेह जहाँ मिल जाए,
उससे बढ़कर कोई सुख नहीं।
मधुर वचन जब बाँटें जग में,
मन का हर संताप मिटे।
किसी के आँसू पोंछ सकें तो,
जीवन के अर्थ नए लिखें।
प्रेम लुटाएँ, द्वेष भुलाएँ,
हर दिल में विश्वास जगाएँ।
दुख की घड़ियों में बन सहारा,
टूटे मन को फिर मुस्काएँ।
प्रकृति, प्रार्थना, सेवा, सद्भाव—
ये ही सच्चे रत्न अनमोल।
जिसने बाँटी खुशी सभी को,
उसके मन में खिला उजास अनमोल।
खुशियों का खजाना बाहर नहीं,
अपने ही भीतर रहता है;
जिस मन में प्रेम का दीप जले,
वही सदा सुखी रहता है।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













