
बेवजह कि बातों को समझे और उसे पहचानते हुए रहना सिखो,
मुस्कुराहट हि जीवन का मजबूत आधार है,
अपनी खुशियों को बांटना शुरू करें, वो कई गुना ज्यादा होकर लोट आएगी,
यूंही चलते चलते मुझे कोई मिल गया था,
सूनसान सड़क पर एक दोस्त मिल गया था ,
उसके आने से मेरे मन का बाग खिल गया था,
अफसोस,कि मुझे थोड़ा अजीब सा लगा है कि
कभी कभी हंसते हंसते हमारे बीच माहौल खिन्न सा हो जाता है,
कभी कभी मनुष्य कहां का ग़ुस्सा कहां निकाल दिया करता हैं,
बिना भाषा को विराम दिए अनर्गल बातें करते हैं,,
किसी को भी ललकार के गुस्से से बतियाते हुए आंखें दिखाता है,
कुछ लोग चिखने चिल्लाने में ही लगे
रहते हैं,
बेबाक बातचीत में बिताया गया वक्त या किसी को उसकी उस समय पर सही ग़लत का भान रखें बिना हि डाट दिया गया तो,,
दुसरे लोगों को भी भय उत्पन्न होता है,
खिन्न होकर आदमी आदमी से दूर हो जाता है,
उसके बाद इंसानियत मर चुकी होती है , आत्मा मर गई तो हमारे बीच नल्ला पन फन फैलाए कुंडली मार कर बैठे हुए हैं ,
और हम सभी स्थिति बेहतर होने के इंतजार में प्यार के पलों को जीना ही भूल चुके होते हैं,
हम सब अपने अनमोल वचन , हमारे अनुभव प्रेम का अभिवादन , स्वीकार नहीं करते हैं,
हमारी ही आंखों के सामने काल सर्प योग बैठा समय, दूर से देख कर हंसी ठहाके लगाने लगता है,
बिगड़ी हुई बोल चाल से ,डाट फटकार लगाने से, और गाली गलौज करने से,
आंखें दिखा कर धमकियों से ,
लोग न जाने कैसी-कैसी बातें करते हैं, और खौफ – जदा माहौल बन गया होता है ,
जितने मुंह उतनी बातें करते हैं कहते हैं
कि कैसा आदमी है, आगे पीछे की सोचता ही नहीं है,,
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













