
जब नर विषयों को, निज बस कर लेता।
भक्ति में समाहित वो, मेरे पास आता है।
और निज चेतना को, मुझमें लगाया जब।
तब बुद्धि थिर हुई, ऐसा कहा जाता है।।
विषयों का चिंतन जो, करता है नियमित।
वह उन विषयों का, भक्त बन जाता है।
अति बेगवान जब, कामना निखार जाती।
तब विघ्न पड़ने से, क्रोध बढ़ जाता है।।













