
पवन शब्द का अर्थ वायु है,
हवा है, पवित्र करने वाला है,
छुए तो तन-मन स्वच्छ कर दे,
जो दिव्य, निर्मल, भाव वाला है।
पाँच महाभूतों में एक पवन है,
पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश संग,
इन्हीं पाँच तत्वों से बना है मानव,
और जीवन चलता है इसी रंग।
पवन तो प्राण का आधार है,
इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं,
श्वास-श्वास में बसा है जो,
उसके बिना कोई जीव जिंदा नहीं।
देव रूप में पूज्य है पवन देवता,
हनुमान के पिता, पवनसुत कहलाते,
बल, बुद्धि, वेग के प्रतीक हैं वे,
संकट में जो हैं दौड़े आते।
संस्कृत में-जो पवित्र कर दे,
वही तो पवन कहलाता है,
समीर, अनिल, वात, मारुत,
वायु,
हर नाम में वही गहराता है।
हे पवन! तुम शुद्ध करो जग को,
आदित्य तुम जीवन, तुम प्राण हो,
तुम बिन सूना है ये सारा संसार,
तुम ही तो सृष्टि के महान हो।
डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












