
बाट देख-देख राधे! घड़ियां बीती जाएं।
नैन दरस के प्यासे कब मधुवन तूं आए।
कान्हा हिय में निहार जरा,क्यूं अकुलाए।
संग न छोडूं हर जन्म हिय कान्हा समाए।
कान्हा मुरली धुन राधा मधुवन में बुलाए।
हर जन्म संग चले राधा जग पूजन आए।
जन-जन हिय बसें देखन को अकुलाए।
वो सितार समाए कोई काव्यरंग बरसाए।
कलिकाल बिछड़ी आत्मा वृंदावन आएं।
मधुर धुन बन कर ‘भ्रमर गीत’ संग गाएं।
‘गीत-गोविंद’बन जन-जन क्लेश मिटाएं।
वृंदावन की गली-गली प्रेम गीत सुनाएं।
आत्माएं अनश्वर पुनर्जन्म में मिलन पाए।
कोई कान्ह में ढूंढे, कोई राधा बन आए।
तड़पत हिय नयन में दरश आस जगाए।
हरि शरण नर-नार मिलन को छटपटाएं।
वो हरि आत्मा में बसें,करे अनश्वर क्रीड़ा।
वृंदावन दिव्यानुभूति इहलोक हरे पीड़ा।
सत्य-प्रेम भाव जगत आत्मा समाये इड़ा।
जग झंझावात में प्रभु नगरी रक्षित निड़ा।
महेश शर्मा, करनाल













