Uncategorized
Trending

आत्मा – परमात्मा का मिलन

प्यासे की प्यास बुझा पाये,
एक झरना ऐसा मिल जाये,
तरो ताज़ा महसूस करे राही,
निर्मल जल उसको मिल जाये,
उसकी सोती आँखे खोले कोई,
बंज़र जीवन फिर हरियाये,
निर्जन मंज़िल की राहों में,
पथ का दर्शन वह करवाये।

कितनी सुंदर है सोच समझ,
मानवता वादी भाव सरस,
अद्भुत, कमाल की हो कविता,
हृदय ग्राही उस रचना के रस,
सर्व शक्ति मान ईश्वर पर,
आस्था विश्वास सदा माने,
लीलाधर अपरम्पार है वह,
उसकी महिमा वह ही जाने।

प्राणी का अस्तित्व नहीं कुछ,
शून्य सदृश उसकी क़ीमत,
साथ मिले शून्य का जिसको,
दस गुना बढ़े उसकी लागत,
आत्मा-परमात्मा से जुड़ना,
विधि का संयोग अलौकिक है,
किंचित कृपा उसी पर बरसे,
जिसकी नियती ही दैविक है।

ऐसा मजबूत व्यक्तित्व वही,
व्यवहारशील, अति सरल हृदय,
सबका साथ, विकास सबका,
जिसका हो सिद्धांत अटल,
दृढ़ता के साथ वक्तव्य रखे,
निर्भीक, निडर जिसका मत हो,
कोई पूर्वाग्रह वह नहीं रखे,
सब जन हितार्थ समर्पित हो।

ऐसा एक राही जब साथ चले,
निर्जन वन में वह राह दिखाए,
देश समाज को जो मिल जाये,
राम राज्य का पथ दिखलाये,
आदित्य की श्रद्धा विनय यही,
मानस को गीता ज्ञान मिले,
भारत माता की जय बोलो,
मेरे भारत को विजय मिले।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *