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जख्म

मत दिखा जख्म अपने दुनिया को हसने का सबब मिल जायेगा आंखों के नीर किसी के नूर का रोशन-ए-कशिश बन जायेगा
दर्द किसी का होता नही ए दिल अपनाने ना कभी कोई फरिश्ता आयेगा
मत दिखा जख्म अपने दुनिया को हसने का सबब मिल जायेगा

पत्थरों की दुनिया है तड़फ कहां से लाऊं
वो धड़कने किसी की किसी के वास्ते कैसे धडकाऊँ
आहें सितमगर सितम की क्या जगाऊं
कसक जीने की खत्म है कैसे जताऊं
हमसाया मुफलिसी दौर को भुलायेगा
क्या मुकाम-ए-रुखसत का ऐसा वक़त भी आयेगा
मत दिखा जख्म अपने दुनिया को हसने का सबब मिल जायेगा

हर पल का ईक ईक कतरा अब नाकाबिल-ए-बर्दास्त है
जीने मरने का फर्क भी एक जैसा अहसास है
ईक एक पल दर्द है तो ईक पल पल की बेचैन आस है
गले मौत को लगाऊं तो रुशवा जिन्दगी होगी
ज़िंदगी से तो मौत भी रूठी होगी कैसे रुशवाई का ये दौर छठ जायेगा मत दिखा जख्म अपने दुनिया को हसने का सबब मिल जायेगा


संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र

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