
जीवन का सुहाना सफ़र, चलता रहे यूँ ही,
हर मोड़ बने एक गीत, हर राह लगे नई।
जीवन का सुहाना सफ़र, चलता रहे यूँ ही,
हर साँस में खुशियाँ रहें, हर आँख रहे हँसी।
कल की फ़िक्र न पाल मन में, आज को तू जी ले,
सुख-दुख दोनों राह के साथी, हँसकर गले लगा ले।
ठोकर भी कुछ कहती है, उसको समझ ज़रा,
गिरकर फिर उठना ही तो, जीवन का है सिलसिला।
मंज़िल चाहे दूर हो कितनी, कदम न रुकने पाएँ,
प्रेम-स्नेह की खुशबू लेकर, रिश्ते सभी सजाएँ।
जो मिला उसे मान उपहार, जो छूटा जाने दे,
बीते कल की परछाईं को, आज न आने दे।
चार दिनों का मेला जीवन, साँसें हैं अनमोल,
सच्चाई की राह पकड़कर, मन के खोलें द्वार।
कल किसने देखा है जग में, आज को मुस्काएँ,
जीवन के इस सुहाने सफ़र को, गीत बनाकर गाएँ।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













