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कविता

दिल को दिल से शुक्रिया अदा किया करो,

करो तुम कुछ भी मगर पुराने दोस्तों को याद भी कर लिया करो ,

कोई बैठा है उम्मीद लगाए कि बातें करके दिल हल्का करेंगे किसी से ,

मेरे चाहने वाला तो दूर न जाने कहां परदेश में रहता है ,

कोई बैठा है आस लिए कि कोई बदलीं आएगी और बरसेगी मेरे भी खेत में,

कोई विकल्प में होता है तो कोई विश्वास में होता है,

और कोई दहलीज़ पर
बैठकर किसी के इंतजार में होता है ,

चाहता है कि लोग देख कर सहम जाए कि उसका दोस्त आ गया है

उसके आने से
ये हवाएं जमीं पर फूल बरसाए ,
और हवाएं खुश्बू लहराएं ,

कि उसका दोस्त आ गया है,

गगन से अमृत बरखा हो,
हर तरफ पुरवाई से संगीत गुंजन करता हो

कि उसका दोस्त आ गया है,

कि हर कोई कहे कि यह मेहमान कैसा आया है ,

जो इतना मोसम बदला बदला है,
आओ
आज सभी मन से मंगल गाए,
खुशियां के साथ शोर मचाएं,
आंगन में खेले नाचे झुमें,
आंगन में रंगोलियां सजाएं
सब कहे कि यहां कौन आ गया है ,

मैं झुम के नाचूं और गाऊं सबसे कहुं जोर जोर से कि

मेरे घर पर नया सूरज आया है,
अंधेरा मिटाकर हर तरफ की धुप और सुगंध लाया है,,

दिल के आंगन में क्या नया रंग छाया है,,

जिंदगी में मुद्दत के बाद अब कहिं जीने का मजा आया है।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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