
शीर्षक- हिंदी हमारी पहचान
विधा – कविता
हिंदी है भारत की भाषा, हिंदी है अभिमान,
हिंदी से ही जग में बढ़ता, भारत का सम्मान।
मधुर-मधुर इसकी वाणी, मन को हरषाती है,
जन-जन के दिल की धड़कन बन, रिश्ते निभाती है।
हिंदी में माँ की ममता है, हिंदी में संस्कार,
हिंदी में संस्कृति बसती, हिंदी जीवन का आधार।
तुलसी, कबीर और प्रेमचंद ने, इसका मान बढ़ाया,
भारत की गौरव गाथा को, हिंदी ने जग में गाया।
हिंदी केवल भाषा नहीं, यह भावों की पहचान,
इसके अक्षर-अक्षर में है, भारत की मुस्कान।
आओ मिलकर आज बढ़ाएँ, हिंदी का सम्मान,
घर-घर हिंदी, जन-जन हिंदी, यही बने अभियान।
नई पीढ़ी को हिंदी से हम, प्रेम सिखाएँ आज,
ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में भी, हिंदी का हो राज।
अपनी भाषा पर गर्व करें हम, यही हमारा नारा,
हिंदी से रोशन हो भारत, सबसे प्यारा देश हमारा।
हिंदी दिवस पर प्रण करें हम, इसका मान बढ़ाएँ,
हिंदी बोलें, हिंदी लिखें, हिंदी को अपनाएँ।
हिंदी है तो हिंदुस्तान की, पहचान सदा बनी रहे,
विश्व पटल पर हिंदी भाषा, यूँ ही सदा खड़ी रहे।
रचनाकार — नंदकिशोर गौतम
माध्यमिक शिक्षक, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बकोड़ी, जिला सिवनी (म.प्र.)













