
विधा : पद्य
हिंदी भाषा यह हिंद का ,
हिंदी भाषा चंद्रभाषी है ।
शिष्ट सभ्य औ विनम्रता ,
निष्ठा मृदुलता प्यासी है ।।
हिंदी तो चंद्र सा शीतल ,
चंद्र सा शीतल प्रकाश है ।
हिंदी से गर्वित ये हिंद है ,
हिंदी प्राचीन इतिहास है ।।
हिंदी रंग तो है हल्दी का ,
हल्दी रंग बहुत शुभ है ।
तम को चिर देत प्रकाश ,
चंद्र कहॅं होत अशुभ है ।।
हिंदी हमारी है हीन नहीं ,
किसने है नाम हीन दी ।
हीन नहीं हिम है यह तो ,
चंद्र शीतल यह हिम दी ।।
हिंदी तो है यह हिंद का ,
हिंद हमारा है हिंदुस्तान ।
हिंदी हमारी बेटी लाड़ली ,
हिंद कहता सीना तान ।।
अरुण दिव्यांश
डुमरी अड्डा
छपरा ( सारण )
बिहार ।













