
हे गणपति, हे शिव नंदन, हे गौरी नंदन
संकट मोचन को गणपति नंदन
तेरा रूप है जग में अलौकिक
जग के हो हितकारी स्वरूप तुम्हारा विनायक
हे गौरी नंदन तुम्हारा रूप है निराला
हाथियों के मुख वाला अति शोभे
एकदंत चारभुजा धारी
जिनके हाथों में पाश ,अंकुश,
मोदक, वर मुद्रा शोभा पाता
हे गणनायक! आपका शरीर है रक्त वर्ण, बड़े पेट वाला, बड़े कान वाला हो तुम
पीत वस्त्र तुम्हें है भाता
सिर पर सिंदूर का तिलक सोहे
मूस की अनूठी सवारी शोभे
हे गजानना! तेरा रूप है लुभावना
सबको लगे बड़ा ही सुहावना
गौरा के लल्ला हो तुम
शिव के प्यारे दुलारे सुत हो तुम
गणपति का स्वरूप है जीवन की एक कला
जो हमें बुद्धि, एकाग्रता, धैर्य और ज्ञान के महत्तव को है सिखाता
बाधाओं को दूर करने , सफलता प्राप्ति में सहायक है बनाता
करते हैं भक्तगण पूजन अर्चन
विघ्नहरो विघ्नेश तुम
सकल कामना सिद्ध करते तुम
सिद्धिविनायक तुम्हारी जय हो
शुभ कार्य में प्रथम पूजा तेरी होती
तुम्हारे बिना कोई कार्य पूर्ण न होती
मेरी इतनी सी अर्ज सुन लो हे गणपतिदेवा!
रिद्धि-सिद्धि संग मेरे घर -आंगन में आओ
देकर आशीष मुझ पर कृपा बरसाओ
नित्य करूं मैं तेरी स्तुति, भजन और आरती
ऐसी मुझ में शक्ति भर दो
गणपति बप्पा मोरया, गणपति बप्पा मोरया
डॉ मीना कुमारी परिहार













