
शायद 2020 के बाद से ये दुनिया अचानक से बदल गई सी लगती है ये मेरे एहसास हैं ,हो सकता है मैं गलत हूँ या सही भी हो सकता हूँ
शादियों की शहनाइयाँ बजनी सी बन्द हो गई हैं या कुछ कम हो गई हैं
व्यस्क बच्चे अब 30 की उम्र पार कर रहे हैं ,कुछ 35 और कुछ 40 पार कर रहे है और तारीफ की बात खुद को बच्चा समझते हैं
कोई इनकी शादी की नही सोच रहा है
विशेष कर लड़कियों की तो शादी की उम्र बस इस लिए पार हो रही है कि इतनी महँगी शादी का खर्च बोध और महँगा होता सोना जो संबंधों को नही होने दे रहा है
कम होता विश्वास और भरोसा नए रिश्ते जुड़ने ही नही दे रहा है
महत्वाकांक्षा और बुनियादी भरोसे का रिश्ता तो समाज से जैसे विलुप्त ही होता जा रहा है
और आने वाला समय बहुत कुछ दिखाने जा रहा है
आधुनिकता की अन्धी दौड़ में हम बहुत कुछ खोते जा हैं जिसका आभास होते होते बहुत देर हो रही है रिश्तों को उनके मुकाम तक पहुचने में।
जिस सामाजिक व्यवस्था को स्थापित होने में कई पीढियां गुजर गईं
उसे विगत कुछ वर्षों में धराशाई होते देखना वाकई बहुत दुखद और पीड़ादायक है
विचार कीजिये क्या बदलता हुआ माहौल आपको दिख नही रहा
समय इतना तेज़ी से क्यों बदल रहा ?
के वी













