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हुनर की एक लौ जला, अँधियारों से लड़ना है,

हुनर की एक लौ जला, अँधियारों से लड़ना है,
सपनों को सच करने को, हर पल आगे बढ़ना है।

हालात भले मुश्किल हों, हिम्मत को न हारेंगे,
मेहनत के छोटे कदमों से, मंज़िल को सँवारेंगे।

किस्मत के भरोसे बैठें, तो सपने सो जाते हैं,
हुनर के हाथों से ही, अवसर खिलखिलाते हैं।

जिसके भीतर सीखने की, सच्ची चाहत होती है,
उसकी मेहनत एक दिन, उसकी ताकत होती है।

पसीने की हर बूँद में, कल का उजियारा है,
संघर्षों की राहों में ही, भविष्य हमारा है।

जो ठोकर से सीख गया, वह आगे बढ़ जाएगा,
जो अपने हुनर को तराशे, वह जग में छा जाएगा।

न धन चाहिए, न शोहरत, बस हुनर का साथ रहे,
हर कोशिश में विश्वास और, आँखों में आस रहे।

हुनर को अपना दीप बना, भविष्य नया रचना है,
अपने हाथों से अपने कल की, सुंदर तस्वीर बनाना है।

डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र

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