
एक बात बोलूं साहेब,हम इंसानों में एक अजीब सी फितरत है,मालूंम है क्या
शुद्ध खाना और पीना हम इंसान अच्छी तरह से जानतें हैं लेकिन हम इंसान शुद्ध
वाणी बोलना अब तक नहीं जान पाएं हैं मालूंम है क्या जिस दिन हम इंसान शुद्ध
और मीठी वाणी बोलना सीख गए उसी दिन समझों आप अच्छे इंसान बन गए
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,










