
कविता
दिल को कभी भी पढ़ नहीं सकता,
इसलिए समय रहते हमने प्यार करना बंद कर दिया,
अफसोस उसके दिल ने आजकल मुझे समझना बंद कर दिया,
मैं कितना भी रोऊं,
उसने मुझे मनाना बंद कर दिया,
सिसकती बेबस आवाज़ नहीं पहुंचा पाया मैं,
उसके कानों ने,सुनना बंद कर दिया,
मैं पुछता हि रहा हुं रोज़ उससे,
अरे तुमने मुझसे क्यों बोलना बंद कर दिया,
आज कल ना जाने किस दुनिया में रहना सिख लिया है उसने ,
उसने मुझसे मिलना जुलना बंद कर दिया,
कितने दिन हो गए बात करें उससे,
उसने मुझसे दूर रहने की ठान ली है आजकल मुझे व्यवहार में अपनाना बंद कर दिया,
कितना लिखता था, कितना बोलता था वो
मगर अफसोस, बिना भाषा में बिना कुछ लिखें ही खाली कागज को ,
खाली लिफाफे में रख कर दे दिया मुझे,
आज कल हमारे बीच चुप्पी साधे हुए प्यार है,
जनाब हमने आजकल बोलना चालना बंद कर दिया।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)










