
कविता
कागज पर दिल उतार लाती है चिट्ठियां
लिखने वाले का मन का उल्लेख होती है,
सुनने वालों का मन का उल्लास होती हैं चिट्ठीयां,
घर घर पहुंचाने वाले का मनुहार कराती है,
हर घर का हर्ष और उम्मीद खास होती है चिट्ठीयां,
प्रेम में दो दिल का राज होती है
उम्र भर का,
और मिल गया प्यार तो,
उपयोग में लाई पतवार होती है चिट्ठीयां,
दो दिलों का मिलने पर सामने प्यारी सी मुस्कान होती है,
प्रेमी प्रेमिका को देने का उपहार स्वरूप इजहार होती हैं चिट्ठीयां,
सजना प्रदेश में गए हैं तो जीने का सहारा होती है पुरानी चिट्ठियां,
सावन भादो मास में एक टीस होती हैं चिट्ठियां,
फिर भी प्रेम में जीते जी मरने को तैयार करती है
चिट्ठियां,
पीहर में मां बाप के छोड़ कर आती है नवेली,
दोस्त बन जाती है चिट्ठियां,
नववधू के लिए संदेश आ जाए पीहर से तो एक विश्वास होती है चिट्ठियां,
ससुराल में तो एक धड़कन,एक सांस होती है
चिट्ठियां,
गांव शहर खेड़ा में दोस्तों को पड़ोसी को सैनिकों को समाचार वाहक होती है चिट्ठियां,
शुक्रिया, बधाईयां एवं शुभकामनाएं देते हैं तो आपके नजदीक है दिल के किसी हिस्से में एक प्यार होती है
चिट्ठियां,
नये रिश्ता बनाती हैं कभी,
तो कभी रश्में निभाना चाहती है चिट्ठियां,
कभी गम पेगाम है,
तो कभी खुशियों का संदेशा हैं
चिट्ठियां
और हर हाल में हाल चाल बतातीं है चिट्ठियां ,
कभी कभी दिल खोलकर हंसाती है चिट्ठियां,
तो कभी कभी बहुत बहुत जोर जोर से सिसकियां देती है
चिट्ठियां
चुपके से बहुत प्यार से
धक्का पहुंचाती है दिल को,
चिट्ठियां
सारी सारी रात हमको रूलाती है चिट्ठियां,
कभी खुली किताब होती है
चिट्ठियां,
कभी कभी बंद किताब में आज भी मिल जाती है चिट्ठियां।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












