
सुमिरन करते शक्ति का ,पूजन करते मात।
नवदुर्गा का आगमन, मिटते दुख आघात।।
नियम धरम उपवास से,जपते दुर्गा नाम।
माता की आराधना, पूरन होते काम।।
पावनता फैली यहां, ,भर लें मन उल्लास।
नव उत्कर्ष फैल रहा,माता से है आस।।
फूल ,दीप अरु नारियल,हलवा पूरी भोग।
माता को अर्पण करें,चूड़ी चुनरी लोग।।
मंदिर भी अब सज गया,नौ दिन होते खास।
शारदेय नवरात्र अति ,जग प्रसिद्ध इतिहास।।
बहुत सुहाना सा लगे,माता का सिंगार।
मात भवानी अरज है,करना बेड़ापार।।
विनती सुन कर मात सब,दूर करें अवसाद।
भक्ति ज्योत जला रही, अर्पित भाव प्रसाद।।
डॉ. नवनीता दुबे नूपुर
मंडला,मप्र, मौलिक।












