
दीप जले हैं चौखट-चौखट, महकी है हर डाली,
माँ के स्वागत में सजती है, दुनिया भोली-भाली।
कोई आँख बिछाए बैठा, कोई मन में आस लिए,
कोई माँ को याद करे, अपने आँसू पास लिए।
आ जाओ माँ, गले लगा लो, मन बहुत उदास है,
तेरे चरणों में ही मैया, हर पीड़ा का एहसास है।
जिस बेटी की राह कठिन है, उसको हिम्मत देना,
जिस माँ की आँखें नम हैं, उसको खुशियाँ देना।
हर टूटे सपने को माँ, फिर से पंख लगाना,
भटके हुए हृदय को मैया, सच्चा मार्ग दिखाना।
तेरे आने से मिट जाएँ, नफ़रत के अँधियारे,
प्रेम-स्नेह से भर जाएँ, दुनिया के हर कोने सारे।
माँ, केवल प्रतिमा बनकर तुम, मंदिर में मत रह जाना,
हर नारी की शक्ति बनकर, उसके साथ निभाना।
तेरे स्वागत में झुका है शीश, आँखों में विश्वास,
माँ, तेरे आगमन से पूरी हो, हर मन की मधुर आस।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र












