Uncategorized
Trending

नवरात्रि विशेष


माँदुर्गाकेनौरूप

प्रथम अर्चना है तुम्हे,शैलपुत्री हे मात,
तुमसे ही संसार की,है उजियारी रात।

ब्रह्मचारिणी मातु तुम, दूजी दुर्गा देह,
भक्तों के दुख दूर कर,देती सबको नेह।

दिवस तीसरे आ गई,होके सिंह सवार,
चंद्रघंटा है माँ तिरा,कल्याणी अवतार।

माँ कुष्मांडा पूजते,चौथे दिन सब लोग,
छट जाती अज्ञानता, मिटते सारे रोग।

स्कंदमातु हैं पाँचवी, दुर्गा का अवतार,
द्वार मोक्ष के खोलती,करती भव से पार।

छठवें दिन कात्यायनी,हुई सिंह आरूढ़,
मोक्ष धर्म धन काम का,देती फल सब गूढ़।

रूप सातवां शक्ति का,कालरात्रि माँ नाम,
रक्षा करती काल से,जग की आठों याम।

माँ गौरी की अर्चना, करें आठवें रोज,
करती पूरी कामना,मन का बढ़ता ओज।

सिद्धीदात्री मातुजा, नवम शक्ति का रूप,
मिले अलौकिक सिद्धियां,भक्तो के अनुरूप।

तुमको नित जो पूजते,,,,,उनको देना तार,
माँ दुर्गा सुखदायिनी,,,,,तुम जग पालनहार।
तुम जग पालनहार,करो कल्याण जगत का,
शरण तुम्हारी खड़े,,,,करो उद्धार भगत का।
कह’पूजा’कविराय,न कुछ भी आता हमको,
अभिलाषा बस यही,कभी नहि भूले तुमको।

अनुजा दुबे ’पूजा’

वरुण, महाराष्ट्र

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *