
विधा- कविता
माँ के चरणों में बसी है, मेरी दुनिया सारी,
माँ ही मेरी शक्ति है, माँ ही खुशियाँ प्यारी।
जब-जब जीवन में आया, दुख का अँधियारा,
माँ ने बनकर ज्योति, मुझको राह दिखाया।
माँ की ममता गंगा जैसी, निर्मल और पावन,
माँ के आँचल में मिलता, सुख का मधुर सावन।
माँ के हाथों में दिखती, दुर्गा की तलवार,
माँ के हृदय में बसता, प्रेम अपार।
वह खुद सहकर पीड़ा, मुझको सुख देती है,
मेरी हर एक मुस्कान पर, सौ खुशियाँ लेती है।
जब भी संकट घेरता है, माँ ढाल बन जाती,
अपने आशीषों से मेरे, दुख सारे हर जाती।
नौ रूपों में पूजी जाती, माँ दुर्गा महारानी,
मेरी माँ में बसती है, शक्ति वही कल्याणी।
मंदिर-मंदिर क्यों भटकूँ, क्यों खोजूँ संसार,
मेरी माँ के चरणों में, मिलता है साक्षात् प्यार।
माँ की सेवा ही पूजा है, माँ का मान ही धर्म,
माँ के आशीषों से ही, जीवन होता धन्य।
माँ ही मेरी श्रद्धा है, माँ ही मेरा अभिमान,
मेरी माँ ही मेरी दुर्गा, माँ ही मेरा भगवान।
रचनाकार: नंदकिशोर गौतम
पद: माध्यमिक शिक्षक
विद्यालय: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बकोड़ी
विकासखंड: कुरई, जिला सिवनी (मध्य प्रदेश)













