
हे मां
जगदम्बा महारानी,, तेरी राहों में कांटे भी फुल खिलाएं,
हे मां
ब्रह्मचारिणी
तपस्विनी स्वयंप्रभा तेरी शरण में
डाल पात भी हर्षाए,
हे मां तुम
तपती गर्मी, सर्दी और बरसात में
अटल अडिग,
शिव शिव गुंजन पुजन जंगल में मंगल हो जाएं,
नवरात्रि में है “””””मां””””
तुम हमेशा दुसरे नवरात्र में पुजाए,
दायें हाथ माल है,
बाएं हाथ में कमंडल सुहाए,
श्वेताम्बर धरा आसन तेरा महारानी,
श्वेत कमल,
श्वेत वस्त्र धारण कर आप
अति सुन्दर सुहाए,
जो भगत भाव से आरती स्तूतियां भजन कीर्तन गाए,
धुप दीप जगरा जला कर,
श्वेत मिश्री भोग लगाएं,
श्वेत पुष्प अर्पित करता है,
उसको अपार शक्ति का आशिष मिल जाए।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













