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एक तीर भीतर के रावण पर

रचनाकार सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश
सर्वाधिकार सुरक्षित

बन्दे संवर जाएगी तुम्हारी भी जिंदगी,
सब जन सदा करेंगे तुझको भी बंदगी,
एक तीर भीतर के रावण पर मार लो।

छल-कपट नहीं कर कभी जग में तुम,
वरना विश्वास हो जाएगा तुम्हारा गुम,
अपने मन की बुरी तरंग तुम मार लो।

अगर तुझको जीवन में आगे बढ़ना है,
तुझे झूठ की सीढ़ी कभी मत चढ़ना है,
झूठ छोड़कर सच की डगर पर चढ़ लो।

इतिहास को पढ़कर जीवन में आगे बढ़,
तू गुज़रे पल से सीख लें मंजिल पर चढ़,
अमर हो गए उनकी कहानी याद कर लो।

देश धर्म पर अपने बलिहारी हो जाओ,
क़र्ज़ चुकाओ जिसका अन जल खाओ,
जयचंद्र जैसी गद्दारी भूल में मत कर लो।

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई है देश की शान,
तुम जात-पात में मत उलझों बचाओ मान,
सैयद आगा हैदर जैसा तुम कुछ कर लों।
स्वरचित और मौलिक गीत
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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