
‘जय माता दी’ के भक्तिमय स्वरों से सजी 268वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी, शारदेय नवरात्रि की महिमा में भावविभोर हुए सृजनकार
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की 268वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी शुभ श्री शारदेय नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर ‘जय माता दी’ विषय को समर्पित रही।
संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि भास्कर सिंह माणिक के कुशल मंच संचालन के कार्यक्रम में अध्यक्षीय दायित्व पंडित सुंदर लाल जोशी ‘सूरज’ ने, जबकि रमापति मौर्य ने मुख्य अतिथि का दायित्व निभाया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ।
इस भक्तिमय साहित्यिक आयोजन में सूरीनाम दक्षिण अमेरिका से सांद्रा लुटावन गणेश, चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. शंकर घनश्याम दास अनदानी, नीलम रानी सक्सेना, डॉ. राजेश तिवारी मक्खन, नंद किशोर बहुखंडी, प्रेम कुमार शर्मा ‘प्रेम’, डॉ. शरद नारायण खरे, ज्योति प्यासी, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, मणिका वर्मा, अंजनी कुमार चतुर्वेदी ‘श्रीकांत’, रानी शर्मा, राकेश माहेश्वरी ‘काल्पनिक’, पंडित अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, दिनेश कुमार दुबे, सुंदर लाल जोशी सूरज, रमापति मौर्य, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र सहित अनेक सृजनकारों ने माता रानी की भक्ति को समर्पित काव्य रचनाओं द्वारा सहभागिता की।
दो चरणों के कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का गायन किया गया। राष्ट्रगीत के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के विशेष संदर्भ में भावपूर्ण गायन के माध्यम से राष्ट्रवंदना प्रस्तुत की। आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों तथा दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आयोजन की सफलता में सभी के योगदान को सराहा। अंत में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की मंगलकामना के साथ शांति पाठ किया गया और 268वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।













