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काव्य गोष्ठी का आयोजन

20 अक्टूबर 2926 मंगलवार को साहित्यकार संगम संस्था के तत्वावधान में श्री नारायण समाचार पत्रालय में विजय दशहरा के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम संस्था के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार शर्मा, संस्था सचिव डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ‘ विद्या – सागर ‘ श्री जय प्रकाश शर्मा ने वीणा वादिनी माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर माल्यार्पण किया। गोष्ठी का शुभारम्भ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। सर्वप्रथम मदनेश शर्मा ने ” मैं लिखूँ गीत कोई, तुम गाकर उसे सुनाओ। शब्दों को आकृति मैं दूँ, रंग भरकर तुम भर जाओ।। राम निवास कंसल ने ” विजय दशमी और दशहरा, रात गुजरी ही नहीं यनि कल बीती रात से, सन्देश, बधाई की शुभकामनाएँ। “मनीष गुप्ता ने ” शस्त्र मिले तो लड़ना सीखो, पुस्तक मिले तो ज्ञान। समय स्थान अनुसार चलें हम, यही तो है गीता का ज्ञान।। ” डॉ. साधना अग्रवाल ने ” बत्ती हुई जो लाल नजारा बदल गया, गाड़ी रुकी तो हाल हमारा बदल गया। ” डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ‘ विद्या सागर ‘ ने ” रावण का पुतला जलाने से, कभी न चल पाएगा काम। मन के हजार रावण जलाने का, तुम सत्वर करो काम तमाम।। “वेदप्रकाश गौतम ने ” चूर चूर इस दिन हुआ, रावण का अभिमान। झूठ पराजित हो गया, सत्य हुआ बलवान।। ” जय प्रकाश शर्मा ने ” जिंदगी तो है प्यार की परिभाषा, जी रहे हैं लिए यही अभिलाषा। ” प्रेम कुमार शर्मा ने ” आओ!अपने जीवन को, राम के पद चिन्हों पर चलाएं। और सब मिलकर राम राज्य बुलाएं, फिर विजय पर्व मनाएँ।। ” कविता पढ़ी। गोष्ठी में प्रेम कुमार शर्मा, डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी ‘ विद्या -सागर ‘, जयप्रकाश शर्मा, डॉ. साधना अग्रवाल, मदनेश शर्मा, रामनिवास कंसल, मनीष गुप्ता, वेदप्रकाश गौतम मौजूद रहे।

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