
क्वार मास की पूर्णिमा आज,
चंदा करता नभ पर राज॥
तम मिटा, चाँदी-सी उजली रात,
अमृत बरसाए, लेकर साथ॥
खिले चाँदनी में कुमुद के फूल,
मंद समीर बहे अति अनुकूल॥
खीर सजी है चाँदनी के पास,
मन में जागे भक्ति-विश्वास॥
सोलह कलाओं से चंदा सजे,
देख धरा का रूप मन रमे॥
मंदिर में गूँजे भजन के बोल,
श्रद्धा से खुलते मन के कपाट॥
राधा संग कृष्ण रचाएँ रास,
प्रेम-सुधा से महके मधुमास॥
गरबा की धुन पर थिरके पाँव,
खुशियों से महके गाँव-गाँव॥
चंद्र-किरणें करतीं उजियार,
हृदय में जागे प्रेम अपार॥
चंद्र-आभा बरसाए प्यार,
महक रहा है सारा संसार॥
डॉ. सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













