
किसी को रोटी की भूख है,
किसी को पैसे की भूख है।
भूख तो सबको है—
किसी को दौलत की, किसी को शोहरत की,
और किसी को बस पेट भरने की भूख है।
किसी का पेट झूठ से भर जाता है,
तो किसी को सच कभी पचता ही नहीं।
कुछ धोखा और फ़रेब को ही जीवन समझते हैं,
और कुछ के जीवन ही धोखा बनकर रह जाते हैं।
उम्र गुज़र गई ठगी में उनकी,
और फ़रेबी वक़्त को बताते रहे।
गीदड़-सी नजरें गडाए बैठे हैं;
कब फँसूँगा दलदल में मै — और वे मेरा शिकार करेंगे।
आर एस लॉस्टम













