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पुस्तक समीक्षा


पुस्तक का नाम -फूल से भारत में (काव्य संग्रह)

.लेखक :-आज़ाद वतन वर्मा जो कि एक विद्वान साहित्यकार मंचीय कवि, लेखक, मध्यप्रदेश शासन के शिक्षा विभाग में व्याख्याता हैं.अनेकों अखिल भारतीय मंचों सहित दूरदर्शन व आकाशवाणी में काव्यपाठ किया हैं और निरंतर उपस्थिति हैं.पता – 151,MIG डीलक्स कॉलोनी, सतना (मध्यप्रदेश)

प्रकाशन -प्रसंग प्रकाशन, जबलपुर मध्यप्रदेश. निदेशक -इंजी. विनोद नयन,संयोजन-प्रोफ़ेसर डॉ. रानू रूही जबलपुर.

समीक्षा :- आज़ाद वतन वर्मा का यह प्रथम काव्य संग्रह हैं.उन्होंने इस काव्य संग्रह को पूज्य पिताजी श्री संत लाल वर्मा जी को सादर समर्पित किया हैं. बाबूजी स्वयं एक अच्छे वक्ता हैं वें कबीर पंथी हैं और आज़ाद जी को ‘कबीर वाणी’ का रसोपान बचपन से कराया गया हैं. इसलिए उनकी रचनाओं में इसका प्रतिबिम्ब स्पष्ट झलकता हैं.प्रकाशित काव्य संग्रह की ‘प्रस्तावना’ ही उन्होंने इन शानदार पंक्तियों से की हैं- ‘कैसी भी हो माटी हमको, पत्थर की चटानों में भी, फूल खिलाना आता हैं’ इन पंक्तियों में ही उन्होंने ओज के तेवर को प्रदर्शित कर दिया है.15 वर्ष की आयु से कविताओं का लेखन और चिंतन बयान करता हैं कि उनकी कलम में कितनी धार हैं. लोकतंत्र की छवि को धूमिल करते राजनीतिकों पर वें लिखते हैं -“ले चल मुझे जहाँ, इंसान न बिकता हो.. खादी की छाया में ईमान न बिकता हो. आज़ाद वतन जी सदभाव के कवि हैं. राष्ट्रीयता उनकी रचनाओं का गहना हैं.वें स्वयं कहते हैं -“असहायता से उत्पन्न आक्रोश मेरी कविता के शब्द बन जाते हैं. “हम आज़ाद नहीं हैं रचना में इस दर्द को स्पष्ट किया हैं -“आज़ादी नहीं थी हमको, आज़ादी आज भी नहीं हैं. जुल्म गुलामी के हमने सहे, अब और सहे जाते नहीं हैं.” शोध ग्रन्थ ‘कबीर के काव्य में बिम्ब योजना ‘ और महाकाव्य ‘सिंहगढ का शेर तानाजी राव’ जिसकी अखिल भारतीय काव्य मंचों पर अनेकों प्रस्तुतियां हो चुकी हैं. वर्तमान हालात को पैनी नज़र से देख़ वें कविता ‘श्रृंगार के गीत कैसे गांऊ में लिखते हैं -“ममता तड़प रहीं हैं, हर दिल में सोई -सोई.. आज़ादी हैं न जाने कहाँ पर खोई-खोई. “गीत श्रंगार के कैसे गांऊ, गाने का वक्त नहीं”सच्चाई देखी और कलम चली तेज गति से.राष्ट्र के एकता की गहरी सोच उनकी रचनाओं में झलकती हैं. कविता ‘एकता एवं अखंडता’ का एक बंध देखिये -“लहू से रंग जाएगी धरती, खून की होली मच जाएगी. आज जहाँ पर नीर हैं बहता, कल वहां लहू की धार बहेगी. एकता और अखंडता हमें, अपने देश के लिये बनाकर रखना, विकराल समस्याओं का संगम यहां, समाधान भी सब लोगों को करना.” कविता नेताजी में उन्होंने शहीद की पत्नी की व्यथा को कुछ यूं बयां किया हैं -“जो जीवन का कर्णधार था, वह भी दर्द सहते-सहते चला गया. कपड़ा उद्योग के मालिक साहेब, आखिरी बार मांगने आई हूं. दिल के टुकड़े की लाश घर रख, दो हाथ कफन लेने आई हूँ. ” यें पंक्तियाँ व्यवस्था पर गहरी चोट हैं. कई शहीदों की विधवाये हक मांगने कार्यालयों के चक्कर काटती नज़र आती हैं.. आफिसों की चकाचौन्द और रौबदार दीवारों में ‘शहीद अमर रहें’ और ‘जब तक सूरज चाँद रहेगा ‘ के नारे गुम हो जाते हैं तब आज़ाद जैसे ओज के कवि इन घटनाओं की सच्चाई को बयां करती रचना गढ़ते हैं. “वक्त नहीं हैं शांत रहने का, उठकर चलना सीखो. अधिकारों का दमन हो रहा, अधिकार बचाना सीखो.”रचना एहसास में उन्होंने मानव जीवन के उदेश्य को उकेरा हैं ‘आज़ाद’ लिखते हैं कि -“सुख-दुःख तो हैं चोली-दामन, जिसमें दुःख न अर्जन हो. धन्य हुआ वह जीवन जिसमें, एहसासों का क़र्ज़ न हो, पशुओं जैसा ही जीना था, फिर इस तन का मतलब क्या. मतलब क्या उन गीतों का, जिस धुन में कोई तर्ज़ न हो.” पड़ोसी मुल्कों की हरकतों पर वें अपनी कविता ‘चेतावनी’ में राष्ट्रभक्ति का दम्भ भरते हुए लिखते हैं -“वैसे तो हम पंचशील के, जंजीरों में बंधे हुए. कायर हमको ना समझो तुम, धूल चटाना आता हैं, पत्थर की चट्टानों में भी फूल खिलाना आता हैं.
30 रचनाओं का काव्य संग्रह हैं जो 101 पन्नों में जड़ा और जुड़ा हुआ हैं. उनकी रचनाओं के शीर्षक हैं-जय भारत के लाल, दर्द, विश्वास, वसुंधरा की पुकार, मंज़िल की खोज, हम आज़ाद नहीं हैं, नशा जाम का, तार, हिम्मत ना हारना, एकता में अखंडता, उपहार, सर्वव्यापी, शहीद की पत्नी, तिरंगा, सावन की बहार, जमाना, प्रयास करना होगा, फूल और शूल, वक्त के साथ, श्रृंगार के गीत कैसे गांऊ, एहसास, कर्म ही पूजा बड़ी, अभिमान, चेतावनी, प्रजातंत्र, अभागान बनी सुहागन, वीरांगना झलकारी, अस्पताल, गीत और शहीद -ए -आजम (क्रांतिकारी उधम सिंह). सभी शीर्षकों को रचना में समाहित कर भावार्थपूर्ण रचनाक्रम हैं. रचनाओं को पढ़ते ही शीर्षक आँखों के सामने उभर आता हैं.
काव्य संग्रह ‘फूल से भारत ‘ की भाषा सरल और सूचितापूर्ण हैं, हर शब्द में वजनदारी हैं, आम पाठकों के मस्तिष्क पर असर करने वाली और पढ़ते ही समझ में आने वाली भाषा हैं. आम बोलचाल के प्रचलित शब्दों का प्रयोग आज़ाद वतन वर्मा जी ने अपनी रचनाओं में किया हैं.मोबाइल नंबर – 7610560130/9993214998 पर सम्पर्क कर काव्य संग्रह मंगाया जा सकता है.
✒️.निष्कर्ष:- सभी रचनाओं के विषय आम घटनाओं, पाठकों और जन सामान्य से जुड़े हुए हैं..उन्होंने जो देखा, जीया, भोगा उसी को कलम से कागज़ पर उतारा हैं. काव्य संग्रह पढ़ते ही जुड़ने का मन करता हैं क्योंकि आम पाठकों के मन की बात काव्य संग्रह में लिखी गई हैं, काव्य संग्रह का शानदार विमोचन संस्था प्रसंग के तत्वावधान में एक भव्य विमोचन समारोह और ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ के साथ 24 जनवरी 2026 को जबलपुर में हुआ हैं. जहाँ साहित्य, न्यायिक, शैक्षणिक, समाजसेवा और पत्रकारिता जगत की बड़ी हस्तियां समारोह में शामिल रहीं. मुझे भी इस भव्य समारोह का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था.🎙️

समीक्षक
शैलेश “शैल”
हास्य -व्यंग्य कवि, लेखक
जिला मीडिया प्रभारी (P.R.O.)
स्वास्थ्य विभाग, बालाघाट

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